एशियाई भाषाएँ और साहित्य पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी

एशियाई भाषाएँ और साहित्य पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी अदेस (ADES) के आयोजन की शुरूआत एर्जीएस विश्वविद्यालय के कला संकाय के व्दारा की गई है। विशेष रूप से यह एशियाई भाषाओं पर वैज्ञानिक शोध के योगदान के लिए और शोधार्थियों को समय-समय पर मिलने के लिए है। आशा है कि इस क्षेत्र में यह एक विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी बने ।

पहला अदेस (ADES) का आयोजन 5 -6 मई 2011 में संपन्न हुआ। इन दिनों भाषा, साहित्य और संस्कृति के साथ-साथ वैज्ञानिक शोध के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए यह एक महत्तवपूर्ण संगोष्ठी थी। इस क्षेत्र में काम करनेवाले व्यक्तिगत एवं संस्थागत शोधार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और नये संबंध बनाए। इस संगोष्ठी में 114 शोध प्रपत्र सार प्राप्त हुए जिनमें 20 देशों और 50 विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ शामिल थे। इनमें से वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड व्दारा चयनित 75 प्रपत्रों का वाचन संगोष्ठी में किया गया।

पहले अदेस (ADES) के आयोजन की सफलता के साथ-साथ हमें विशेषज्ञों की रूचि प्राप्त हुई इसलिए हमनें तय किया कि दूसरे अदेस (ADES) का आयोजन 3-4 मई, 2012 होगा। इस संगोष्ठी के आयोजन और सलाहकार बोर्ड के प्रतिनिधी 5 देशों और 12 विश्वविद्यालयों के अध्यापक अदेस (ADES) के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे थे। दूसरे अदेस (ADES) का प्रमुख विषय था “21वी. सदी में एशियाई भाषाओं का अध्यापन”। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य चीनी, भारतीय ,जापानी और उर्दू विदेशी भाषाओं के अध्ययन और वैज्ञानिक संदर्भ में शिक्षा के दौरान आनेवाली समस्याएँ एवं शोध प्रविधि की प्राथमिक समस्याओं पर था। संगोष्ठी के शोध प्रपत्रों के सार के मूल्यांकन के बाद 63 प्रपत्र को चयन किया गया जिनमें 72 % प्रतिभागी विदेशों के 20 विश्वविद्यालयों (जैसे – ऑस्ट्रेलिया, अज़रबैजान, बांग्लादेश, चीन, इंग्लैंड, जर्मनी, भारत, ईरान, इटली, जापान, कज़ाखिस्तान, मलेशिया, पाकिस्तान, रशिया, सर्बिया, सिंगापुर, साउथ अफ्रिका, स्विट्जरलैंड, अमेरिका और तुर्की) के प्रपत्रों को स्वीकृत किया गया।

व्दितीय अदेस (ADES) के मिटिंग में संगोष्ठी का मूल्यांकन के बाद यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक दो वर्ष में एक बार अदेस (ADES) का आयोजन किया जाएगा। इसका कारण यह रहा कि समय-समय पर विद्वानों की रुचि एवं इस क्षेत्र की उपलब्धि है।

अदेस (ADES) संघटन का तीसरा अदेस (ADES) एर्जीएस विश्वविद्यालय के मेज़बानी में 8 – 9 मई, 2014 को कैसरी में संपन्न हुआ। इस संगोष्ठी में विभिन्न देशों के 24 शोधार्थियों नें जिनमें पांच देशों के (जैसे तुर्की, चीन, जापान, भारत और पाकिस्तान) रेफरी, सलाहकार और आयोजन बोर्ड के रुप में कार्यभार संभाला। तीसरे अदेस (ADES) संगोष्ठी में 55 विश्वविद्यालयों के 17 विभिन्न देशों के 92 शोधार्थियों ने शोध प्रपत्र का सार भेजा था। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय “साहित्य और संस्कृति” था। इसमें से 51 शोध प्रपत्र सार को स्वीकृत किया गया।

अदेस (ADES) की तीन संगोष्ठियों के मूल्यांकन के बाद यह देखा गया कि तुर्की के 189 प्रतिभागियों ने इस संगोष्ठी में भाग लिया। इस संगोष्ठी का मेज़बान तुर्की कर रहा था जिसके कारण इसका सबसे अधिक प्रतिशत (43,4%), चीन का 10.6 प्रतिशत तो भारत का 9.0 प्रतिशत शोधार्थियों नें इस संगोष्ठी में शिरकत की। इसी कारण से यह निर्णय लिया गया कि चौथा अदेस (ADES) विदेश में होगा और भारत से पारस्पारिक बातचीत एवं सहयोग के कारण भारत के विश्वविद्यालय के साथ होना तय हुआ।

चौथा अदेस (ADES) एर्जीएस विश्वविद्यालय और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाडा विश्वविद्यालय के तत्वावधान में 2 – 4 फरवरी, 2017 को औरंगाबाद, महाराष्ट्र, भारत में संपन्न हुआ जिसका विषय था “संस्कृति को समझना”। इस संगोष्ठी में 157 शोध प्रपत्र सार प्राप्त हुए थे उनमें से 76 प्रपत्रों का वाचन विभिन्न देशों (अज़रबैजान, जर्मनी, भारत, ईरान, कज़ाखिस्तान,मलेशिया, मॉरिशस, पाकिस्तान, श्रीलंका, तुर्की और अमेरिका) के शोधार्थियों ने किया। इस चौथे अदेस (ADES) संगोष्ठी में विभिन्न शोधार्थियों को इकट्ठा करके संस्कृति का वाचन, एशिया के भौगोलिक परिप्रेक्ष के व्दारा देखा गया। इसके साथ-साथ संस्कृति की छानबीन की कोशिश जन्म, अंतिम संस्कार, राग और व्यंजन के पाठ एशियाई इतिहास के व्दारा किया गया।

एशियाई भूगोल पर वैज्ञानिक सुविधा ध्यान केन्द्रित कर रही है। इसमें विभिन्न शोधार्थी, शाखाएं, देश और संस्थाओं और क्रमिक रुप से संगठित होने के लिए सोच रही है। अदेस (ADES) अपने ऐसे योगदानकर्ताओं के लिए एक अच्छी जगह है। इस संघठन में अधिक से अधिक शामिल होकर अपना योगदान दे जिससे शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पारस्पारिक लाभ होंगे।